ततः प्रविशति प्राणे चिदर्क एकैकया कलया अपानचन्द्रम् आपूरयति यावत् पञ्चदशी तुटिः पूर्णिमा तदनन्तरं पक्षसन्धिः ग्रहणं च इति प्राग्वत् एतत् तु ऐहिकफलप्रदम् इति मासोदयः
Transliteration (IAST)
tataḥ praviśati prāṇe cidarka ekaikayā kalayā apānacandram āpūrayati yāvat pañcadaśī tuṭiḥ pūrṇimā tadanantaraṃ pakṣasandhiḥ grahaṇaṃ ca iti prāgvat etat tu aihikaphalapradam iti māsodayaḥ
फिर प्राण के प्रवेश करने पर चित्-अर्क एक-एक कला से अपान-चन्द्र को आपूरित करता है, जब तक पन्द्रहवीं तुटि पूर्णिमा (न हो जाये)। उसके अनन्तर पूर्ववत् पक्ष-सन्धि एवं ग्रहण होते हैं; किन्तु यह ऐहिक (इस लोक का) फल प्रदान करने वाला है — यह मास का उदय है।