The Essence of the Tantra· 6.18 / 82

The Essence of the Tantra6.18

6.18

प्रमातृप्रमाणप्रमेयत्रितयाविभागकारित्वात् स पुण्यः कालः पारलौकिकफलप्रदः

Transliteration (IAST)

pramātṛpramāṇaprameyatritayāvibhāgakāritvāt sa puṇyaḥ kālaḥ pāralaukikaphalapradaḥ

— प्रमातृ-प्रमाण-प्रमेय त्रितय के अविभाग को करने के कारण ; — पुण्य (मांगलिक) काल ; — पारलौकिक फल प्रदान करने वाला

प्रमातृ-प्रमाण-प्रमेय त्रितय के अविभाग को करने के कारण वह पुण्य काल पारलौकिक फल प्रदान करने वाला है।