The Essence of the Tantra· 5.33 / 43

The Essence of the Tantra5.33

5.33

प्राणादयो व्याननपश्चिमास् तल्लीनश् च जाग्रत् प्रभृति प्रपञ्चः

Transliteration (IAST)

prāṇādayo vyānanapaścimās tallīnaś ca jāgrat prabhṛti prapañcaḥ

— प्राण से लेकर (वायु) ; — व्यान पर्यन्त (अन्तिम व्यान) ; — उसमें लीन ; — जाग्रत् आदि प्रपञ्च

प्राण से लेकर व्यान-पर्यन्त (वायु), तथा उसमें लीन जाग्रत् आदि प्रपञ्च (इन्हीं में समाहित हैं)।