The Essence of the Tantra· 5.32 / 43

The Essence of the Tantra5.32

5.32

व्याप्त्याथ विश्राम्यति ता इमाः स्युः शून्येन साकं षडुपायभूम्यः

Transliteration (IAST)

vyāptyātha viśrāmyati tā imāḥ syuḥ śūnyena sākaṃ ṣaḍupāyabhūmyaḥ

— तदनन्तर व्याप्ति से विश्राम करता है ; — शून्य के साथ ; — छह उपाय-भूमियाँ

तदनन्तर वह व्याप्ति से विश्राम करता है। ये (अवस्थाएँ) शून्य के साथ छह उपाय-भूमियाँ हैं।