The Essence of the Tantra· 20.47 / 65

The Essence of the Tantra20.47

20.47

यदा प्राप्यापि विज्ञानं दूषितं परमेशशासनं तदा प्रायश्चित्ती

Transliteration (IAST)

yadā prāpyāpi vijñānaṃ dūṣitaṃ parameśaśāsanaṃ tadā prāyaścittī

— जब ; — प्राप्त करके भी ; — विज्ञान, विवेक-ज्ञान ; — दूषित, कलुषित ; — परमेश्वर का शासन (अनुशासन) ; — तब ; — प्रायश्चित्त का पात्र

'जब विज्ञान को प्राप्त करके भी परमेश्वर का शासन दूषित (हो जाता है), तब (वह) प्रायश्चित्त का पात्र (होता है)।'