तन्त्रसार
Tantrasāra
- 1 yadā punar āsannamaraṇasya svayaṃ vā bandhumukhena śaktipāta upajāyate … जब पुनः आसन्न-मरण (निकट-मृत्यु) वाले में स्वयं अथवा बन्धु के मुख से शक्तिपात उपजे, तब…
- 2 samastam adhvānaṃ śiṣye nyasya taṃ ca krameṇa śodhayitvā … समस्त अध्वा को शिष्य में न्यस्त कर, उसे क्रमशः शोधित कर, मर्म-कर्तनी (मर्मों को काटने…
- 3 tataḥ pūrvoktakrameṇa yojanikārthaṃ pūrṇāhutiṃ dadyāt yathā pūrṇāhutyante jīvo … तदनन्तर पूर्वोक्त क्रम से योजना के लिए पूर्णाहुति दे, जिससे पूर्णाहुति के अन्त में जीव…
- 4 bubhukṣos tu dvitīyā pūrṇāhutiḥ किन्तु बुभुक्षु (भोग-इच्छुक) के लिए द्वितीय पूर्णाहुति (होती है)।
- 5 bhogasthāne yojanāya tatkāle ca tasya jīvalayaḥ nātra śeṣavartanam … (यह) भोग-स्थान में योजना के लिए (है), और उसी काल में उसका जीव-लय (हो जाता है);
- 6 samayyāder api ca etatpāṭhe 'dhikāraḥ और समयी आदि का भी इसके पाठ में अधिकार है।
- 7 sapratyayāṃ nirbījāṃ tu yadi dīkṣāṃ mūḍhāya āyātaśaktipātāya ca … किन्तु यदि मूढ़ एवं आयात-शक्तिपात (जिसे शक्तिपात प्राप्त हो) के लिए सप्रत्यय (दृश्य…