The Essence of the Tantra· 15.3 / 7

The Essence of the Tantra15.3

15.3

ततः पूर्वोक्तक्रमेण योजनिकार्थं पूर्णाहुतिं दद्यात् यथा पूर्णाहुत्यन्ते जीवो निष्क्रान्तः परमशिवाभिन्नो भवति

Transliteration (IAST)

tataḥ pūrvoktakrameṇa yojanikārthaṃ pūrṇāhutiṃ dadyāt yathā pūrṇāhutyante jīvo niṣkrāntaḥ paramaśivābhinno bhavati

— तदनन्तर ; — पूर्वोक्त क्रम से ; — योजना (संयोजन) के लिए ; — पूर्णाहुति दे ; — जिससे, यथा ; — पूर्णाहुति के अन्त में ; — जीव निष्क्रान्त होकर (बाहर निकलकर) ; — परमशिव से अभिन्न हो जाता है

तदनन्तर पूर्वोक्त क्रम से योजना के लिए पूर्णाहुति दे, जिससे पूर्णाहुति के अन्त में जीव निष्क्रान्त होकर परमशिव से अभिन्न हो जाये।