The Essence of the Tantra· 13.74 / 101

The Essence of the Tantra13.74

13.74

शङ्कातङ्कौ हि तथास्य स्याताम् केवलम् अस्त्रेण तन्निष्कृतिं कुर्यात्

Transliteration (IAST)

śaṅkātaṅkau hi tathāsya syātām kevalam astreṇa tanniṣkṛtiṃ kuryāt

— शंका एवं आतंक (चिन्ता) ; — इससे इसके लिए हो सकते हैं ; — केवल अस्त्र-मन्त्र से ; — उसकी निष्कृति (निवारण) करे

क्योंकि इससे इसके लिए शंका एवं आतंक (चिन्ता) हो सकते हैं; केवल अस्त्र (मन्त्र) से उसकी निष्कृति (निवारण) करे।