The Essence of the Tantra· 13.18 / 101

The Essence of the Tantra13.18

13.18

तत्र परमेश्वरस्वातन्त्र्यम् एव मूर्त्याभासनया दिक्तत्त्वम् अवभासयति

Transliteration (IAST)

tatra parameśvarasvātantryam eva mūrtyābhāsanayā diktattvam avabhāsayati

— परमेश्वर का स्वातन्त्र्य ; — मूर्ति के आभासन से (रूप के प्रकटन से) ; — दिक्-तत्त्व (दिशा/स्थान-तत्त्व) ; — अवभासित करता है, प्रकट करता है

वहाँ परमेश्वर का स्वातन्त्र्य ही मूर्ति के आभासन (प्रकटन) से दिक्-तत्त्व को अवभासित करता है।