Stanzas on the Divine Pulsation · 3.13

Stanzas on the Divine Pulsation 3.13

3.13
शब्दराशिसमुत्थस्य शक्तिवर्गस्य भोग्यताम् । कलाविलुप्तविभवो गतः सन्स पशुः स्मृतः ॥१३॥
śabda-rāśi-samutthasya śakti-vargasya bhogyatām | kalā-vilupta-vibhavo gataḥ san sa paśuḥ smṛtaḥ ||
anuṣṭubh
— शब्द-राशि (अक्षर-समूह) से उत्पन्न (शक्तियों) का — षष्ठी एकवचन — समासगत ; — शक्ति-वर्ग का — शक्तियों के समूह का (षष्ठी एकवचन — समासगत) ; — भोग्यता — भोग्य होने की स्थिति (कर्म कारक, स्त्रीलिङ्ग) ; — कला (सीमित करने वाली शक्ति) से जिसका वैभव लुप्त हो गया है (कर्ता कारक — समासगत) ; — गया हुआ, प्राप्त (पु.कर्ता एक. ppp √गम्) ; — होते हुए, विद्यमान (वर्त. कृदन्त पु.कर्ता एक. √अस्) ; — वह — पु.कर्ता एक. सर्वनाम ; — पशु — बद्ध जीव, बँधा हुआ प्राणी (कर्ता कारक) ; — कहा गया है, माना जाता है (पु.कर्ता एक. ppp √स्मृ)

जो शब्द-राशि से उत्पन्न शक्ति-वर्ग का भोग्य बन गया है, और जिसका वैभव कला (सीमित करने वाली शक्ति) से लुप्त हो गया है — वह पशु (बद्ध जीव) कहलाता है।