yām avasthāṃ samālambya yad ayaṃ mama vakṣyati |
tad avaśyaṃ kariṣye 'ham iti saṅkalpya tiṣṭhati ||
anuṣṭubh
— जिस — स्त्री.कर्म एक. सम्बन्धवाचक; — अवस्था को — स्त्री.कर्म एक.; — समालम्बन करके, सहारा लेकर (पूर्वकालिक क्रिया); — जो भी — नपुं.कर्म एक. सम्बन्धवाचक; — यह (पुरुष, प्रतिवादी) — पु.कर्ता एक.; — मेरा — षष्ठी एक. सर्वनाम; — (वह) कहेगा (भविष्य काल); — उस को — नपुं.कर्म एक.; — अवश्य, निश्चय ही (अव्यय); — मैं करूँगा (भविष्य काल, उत्तम पुरुष); — मैं — कर्ता एक. सर्वनाम; — इस प्रकार, ऐसा (उद्धरण-समापक अव्यय); — संकल्प करके, निश्चय करके (पूर्वकालिक क्रिया); — स्थिर रहता है, अवस्थान करता है (वर्तमान काल)
जिस अवस्था का आश्रय लेकर वह संकल्प करता है कि 'यह (पुरुष) मुझसे जो कहेगा, मैं उसे अवश्य करूँगा' — और (उसी में स्थिर) रहता है (उसी स्थिरता में स्पन्द है)।