— अत्यन्त क्रुद्ध, अति क्रोधित (विशेषण, कर्ता कारक); — अत्यन्त प्रसन्न, हर्षित (भूत कृदन्त, कर्ता कारक); — अथवा, या (विकल्पार्थक अव्यय); — 'मैं क्या करूँ?' (पदबन्ध); — इस प्रकार, ऐसा (उद्धरण-समापक अव्यय); — अथवा, या (विकल्पार्थक अव्यय); — विचार करते हुए, ऊहापोह करते हुए (वर्तमान कृदन्त, कर्ता कारक); — दौड़ते हुए (वर्तमान कृदन्त, कर्ता कारक); — अथवा, या (विकल्पार्थक अव्यय); — जिस पद (अवस्था) को — कर्म कारक; — जाए, पहुँचे (विधिलिङ्ग, तृ.पु.एक. √गम्); — वहाँ, उस में (अव्यय); — स्पन्द (दिव्य स्पन्दन तत्त्व) — पु.कर्ता एक.; — प्रतिष्ठित, दृढ़तया स्थापित (भूत कृदन्त, कर्ता कारक)
अत्यधिक क्रोधित, अत्यन्त प्रसन्न, 'क्या करूँ?' सोचते हुए विचलित, अथवा (प्राण-रक्षा के लिए) दौड़ता हुआ — जिस पद (अवस्था) में पहुँचता है, वहाँ स्पन्द प्रतिष्ठित (दृढ़तया स्थित) है।