— इसलिए, अतः (अव्यय); — सतत उद्यत — सदा प्रयत्नशील (कर्ता कारक एकवचन — पदबन्ध); — स्पन्द-तत्त्व के विवेक के लिए (सम्प्रदान कारक — समासगत); — जाग्रत् अवस्था में ही (अव्यय); — निज भाव — अपने स्वस्वरूप को (कर्म कारक); — अचिर में, शीघ्र ही (अव्यय); — प्राप्त करता है, पहुँचता है (वर्तमान काल)
अतः जो स्पन्द-तत्त्व के विवेक के लिए सदा उद्यत रहता है, वह जाग्रत् अवस्था में ही शीघ्र अपने निज भाव (स्वस्वरूप) को प्राप्त कर लेता है।