The Vision of Śiva· 7.99 / 122

The Vision of Śiva7.99

7.99
भिन्नोऽप्यभिन्न एवास्मि शिव इत्थं विचेष्टनम् । शिवो भोक्ता शिवो भोज्यं शिवेषु शिवसाधनः ॥९९॥
bhinno'pyabhinna evāsmi śiva itthaṃ viceṣṭanam | śivo bhoktā śivo bhojyaṃ śiveṣu śivasādhanaḥ
— (आभासतः) भिन्न होकर भी ; — अभिन्न ही हूँ ; — शिव ; — इस प्रकार विचेष्टन (व्यापार) ; — शिव भोक्ता ; — शिव भोज्य ; — शिवों में ; — शिव-साधन

(आभासतः) भिन्न होकर भी मैं अभिन्न ही हूँ, (क्योंकि मैं) शिव हूँ — इस प्रकार समस्त विचेष्टन (व्यापार) है: शिव भोक्ता है, शिव भोज्य है, (और) शिवों में (शिव ही) साधन है।