भुक्त्वोदेति शिवावस्था स्थितेत्थं भोक्तृरूपता ।
शिवः कर्ता शिवः कर्म शिवोऽस्मि करणात्मकः ॥१००॥
bhuktvodeti śivāvasthā sthitetthaṃ bhoktṛrūpatā |
śivaḥ kartā śivaḥ karma śivo'smi karaṇātmakaḥ
भोग करके शिव-अवस्था उदित होती है; इस प्रकार भोक्तृ-रूपता (भोक्ता-स्वरूप) स्थित रहती है। शिव कर्ता है, शिव कर्म है, मैं शिव हूँ, (और) करण-स्वरूप भी (शिव ही है)।