The Vision of Śiva· 7.101 / 122

The Vision of Śiva7.101

7.101
शिव एव फलावस्था व्यापार इति साधुषु । भावनाकरणाभ्यां किं शिवस्य सततोदितेः ॥१०१॥
śiva eva phalāvasthā vyāpāra iti sādhuṣu | bhāvanākaraṇābhyāṃ kiṃ śivasya satatoditeḥ
— शिव ही ; — फल-अवस्था ; — व्यापार (क्रिया) ; — इस प्रकार ; — साधुओं में ; — भावना तथा करण से ; — क्या (प्रयोजन)? ; — शिव के लिए ; — सतत-उदित

शिव ही फल-अवस्था है, (और) व्यापार (क्रिया) भी — ऐसा साधुओं (श्रेष्ठ साधकों) में (प्रतिष्ठित है)। सतत-उदित (नित्य प्रकाशमान) शिव के लिए भावना तथा करण से क्या (प्रयोजन)?