शिव एवानया स्थित्या सत्यया याग उत्तमः ।
येन येन यत्र यत्र यैर्यैर्यदिह चेज्यते ॥९७॥
śiva evānayā sthityā satyayā yāga uttamaḥ |
yena yena yatra yatra yairyairyadiha cejyate
इस सत्य (वास्तविक) स्थिति (दृष्टिकोण) के द्वारा शिव ही उत्तम याग (यज्ञ) है; जिस-जिस (साधन) से, जहाँ-जहाँ, जिन-जिन (उपकरणों) से, जो कुछ यहाँ यज्ञ में अर्पित किया जाता है (— वह सब शिव ही है, जैसा अगली कारिका कहती है)।