The Vision of Śiva· 6.14 / 126

The Vision of Śiva6.14

6.14
अविद्यां वेत्त्यविद्यैव बध्नात्यात्मानमेव वा । सैवेति वादो येषां वा तेषां वेदान्तवादिनाम् ॥१४॥
avidyāṃ vettyavidyaiva badhnātyātmānameva vā | saiveti vādo yeṣāṃ vā teṣāṃ vedāntavādinām
— अविद्या को ; — जानती है ; — अविद्या ही ; — बाँधती है ; — आत्मा को ही ; — अथवा ; — वही ; — ऐसा वाद ; — अथवा जिनका ; — उन वेदान्तवादियों का

'अविद्या ही अविद्या को जानती है', अथवा 'वही (अविद्या) आत्मा को बाँधती है' — ऐसा जिन अन्य वेदान्तवादियों का वाद है (और प्रत्येक भेद की अपनी असंगति है)।