The Vision of Śiva· 4.57 / 124

The Vision of Śiva4.57

4.57
अभिव्यक्तेर्विनाशित्वे तथाप्यानन्त्यमापतेत् ॥५७॥
abhivyaktervināśitve tathāpyānantyamāpatet
— अभिव्यक्ति का ; — विनाश होने पर ; — तब भी ; — अनन्त्य (अनवस्था) ; — आ पड़ेगी

(और यदि कहो कि) अभिव्यक्ति का विनाश होता है — तब भी अनन्त्य (अनवस्था) आ पड़ेगी (क्योंकि उसके विनाश के लिए और अभिव्यक्ति चाहिए, और आगे भी)।