The Vision of Śiva· 4.12 / 124

The Vision of Śiva4.12

4.12
तस्यापि किं शिवावाप्तिः कथमुक्ता ह्यसत्यता ॥१२॥
tasyāpi kiṃ śivāvāptiḥ kathamuktā hyasatyatā
— उस (व्यवहार) को भी ; — क्या ; — शिवावाप्ति (शिवत्व-प्राप्ति) ; — कैसे ; — कही गई ; — क्योंकि ; — असत्यता

क्या उस (व्यवहार) को भी शिवावाप्ति (शिवत्व-प्राप्ति) है? और (यदि वह भी शिव है) तो उसकी असत्यता कैसे कही गई?