तस्यापि किं शिवावाप्तिः कथमुक्ता ह्यसत्यता ॥१२॥
tasyāpi kiṃ śivāvāptiḥ kathamuktā hyasatyatā
क्या उस (व्यवहार) को भी शिवावाप्ति (शिवत्व-प्राप्ति) है? और (यदि वह भी शिव है) तो उसकी असत्यता कैसे कही गई?
क्या उस (व्यवहार) को भी शिवावाप्ति (शिवत्व-प्राप्ति) है? और (यदि वह भी शिव है) तो उसकी असत्यता कैसे कही गई?