The Vision of Śiva· 4.11 / 124

The Vision of Śiva4.11

4.11
व्यवहारस्य सत्यत्वे सर्वत्रासत्यतैव ते ॥११॥
vyavahārasya satyatve sarvatrāsatyataiva te
— व्यवहार की ; — सत्यता होने पर ; — सर्वत्र ; — असत्यता ही ; — तुम्हारे (मत में)

यदि सत्यता (केवल) व्यवहार की हो, तो तुम्हारे (मत में) सर्वत्र असत्यता ही (हो जाएगी)।