व्यवहारस्य सत्यत्वे सर्वत्रासत्यतैव ते ॥११॥
vyavahārasya satyatve sarvatrāsatyataiva te
यदि सत्यता (केवल) व्यवहार की हो, तो तुम्हारे (मत में) सर्वत्र असत्यता ही (हो जाएगी)।
यदि सत्यता (केवल) व्यवहार की हो, तो तुम्हारे (मत में) सर्वत्र असत्यता ही (हो जाएगी)।