व्यवहारस्तु दीनारैरेतैरव्यवहारगैः ॥१०॥
vyavahārastu dīnārairetairavyavahāragaiḥ
किन्तु व्यवहार इन (वास्तविक) दीनारों (स्वर्ण-मुद्राओं) से (होता है) — जो स्वयं व्यवहार-गत (व्यवहार की कृति मात्र) नहीं (अपितु वास्तविक सत्ता वाले हैं)।
किन्तु व्यवहार इन (वास्तविक) दीनारों (स्वर्ण-मुद्राओं) से (होता है) — जो स्वयं व्यवहार-गत (व्यवहार की कृति मात्र) नहीं (अपितु वास्तविक सत्ता वाले हैं)।