२शैवैः सद्भिर्वाच एव पश्यन्त्यादिक्रमे स्थिताः ।
कल्पितास्तैरशैवत्वमात्मनः प्रतिपादितम् ॥९॥
2śaivaiḥ sadbhirvāca eva paśyantyādikrame sthitāḥ |
kalpitāstairaśaivatvamātmanaḥ pratipāditam
कुछ श्रेष्ठ शैवों द्वारा वाक् के ही (स्तर) पश्यन्ती आदि के क्रम में स्थित कल्पित किए गए हैं; (किन्तु) उनके द्वारा (इस प्रकार) अपना अशैवत्व ही प्रतिपादित किया गया है।