The Vision of Śiva· 3.9 / 99

The Vision of Śiva3.9

3.9
२शैवैः सद्भिर्वाच एव पश्यन्त्यादिक्रमे स्थिताः । कल्पितास्तैरशैवत्वमात्मनः प्रतिपादितम् ॥९॥
2śaivaiḥ sadbhirvāca eva paśyantyādikrame sthitāḥ | kalpitāstairaśaivatvamātmanaḥ pratipāditam
— शैवों द्वारा ; — श्रेष्ठ ; — वाक् के ही ; — पश्यन्ती आदि के क्रम में ; — स्थित ; — कल्पित ; — उनके द्वारा ; — अशैवत्व ; — अपना ; — प्रतिपादित किया गया

कुछ श्रेष्ठ शैवों द्वारा वाक् के ही (स्तर) पश्यन्ती आदि के क्रम में स्थित कल्पित किए गए हैं; (किन्तु) उनके द्वारा (इस प्रकार) अपना अशैवत्व ही प्रतिपादित किया गया है।