The Vision of Śiva· 3.87 / 99

The Vision of Śiva3.87

3.87
पश्यन्त्याथो शिवावस्था क्रियाफलसमाप्तितः । क्रियाया वाथ प्रारम्भे कल्पनीया प्रशान्तता ॥८७॥
paśyantyātho śivāvasthā kriyāphalasamāptitaḥ | kriyāyā vātha prārambhe kalpanīyā praśāntatā
— 'देखने' (पश्यन्ती-दर्शन) से ; — अब ; — शिव-अवस्था ; — क्रिया के फल की समाप्ति पर ; — क्रिया के ; — अथवा ; — तब ; — प्रारम्भ में ; — कल्पनीय ; — प्रशान्तता

(आक्षेप:) अब, 'देखने' (पश्यन्ती-दर्शन) से शिव-अवस्था (शुद्ध शान्ति) — या तो क्रिया के फल की समाप्ति पर, अथवा क्रिया के प्रारम्भ में — (वहाँ) प्रशान्तता कल्पनीय है।