The Vision of Śiva· 3.86 / 99

The Vision of Śiva3.86

3.86
सत्यानि स्वात्मरूपाणि पश्यतो न समानता ॥८६॥
satyāni svātmarūpāṇi paśyato na samānatā
— सत्य ; — अपने आत्म-रूप वाली (वस्तुओं को) ; — देखने वाले की ; — नहीं ; — समानता

जो (शिव जगत् के पदार्थों को) सत्य और अपने ही आत्म-रूप के रूप में देखता है, उसकी (पश्यन्ती के साथ) समानता नहीं (क्योंकि पश्यन्ती जगत् को असत्य देखती है)।