The Vision of Śiva· 3.37 / 99

The Vision of Śiva3.37

3.37
विभागस्तद्वदीशस्य मध्योत्कृष्टनिकृष्टकैः । भावैर्नास्ति विभेदत्वमथवाम्बुधिवीचिवत् ॥३७॥
vibhāgastadvadīśasya madhyotkṛṣṭanikṛṣṭakaiḥ | bhāvairnāsti vibhedatvamathavāmbudhivīcivat
— विभाग ; — वैसे ही ; — ईश का ; — मध्यम, उत्कृष्ट और निकृष्ट के द्वारा ; — भावों से ; — नहीं है ; — विभेदता ; — अथवा ; — समुद्र और तरंग के समान

— वैसे ही ईश का मध्यम, उत्कृष्ट और निकृष्ट भावों के द्वारा (वास्तविक) विभाग नहीं; (उसमें) विभेदता नहीं है। अथवा समुद्र और तरंग के समान (समझो)।