यथा न योगिनोऽस्तीह नानासैन्यशरीरकैः ॥३६॥
yathā na yogino'stīha nānāsainyaśarīrakaiḥ
जैसे योगी का (जो सेना की रचना करता है) यहाँ उस सेना के नाना शरीरों के द्वारा (वास्तविक) विभाग नहीं होता —
जैसे योगी का (जो सेना की रचना करता है) यहाँ उस सेना के नाना शरीरों के द्वारा (वास्तविक) विभाग नहीं होता —