The Vision of Śiva· 2.8 / 90

The Vision of Śiva2.8

2.8
यस्मात्तैरुच्यते सद्भिरेवं वस्तुप्रवृत्तये ॥८॥
yasmāttairucyate sadbhirevaṃ vastupravṛttaye
— क्योंकि ; — उनके द्वारा ; — कहा जाता है ; — सत्पुरुषों द्वारा ; — इस प्रकार ; — वस्तुओं के व्यवहार के लिए

— क्योंकि वस्तुओं के व्यवहार के लिए उन सत्पुरुषों द्वारा इस प्रकार कहा गया है।