The Vision of Śiva· 2.9 / 90

The Vision of Śiva2.9

2.9
विवर्ततेऽर्थभावेन प्रक्रिया जगतो यतः ॥९॥
vivartate'rthabhāvena prakriyā jagato yataḥ
— विवर्तित होता है (विकार-रूप में प्रतीत होता है) ; — अर्थ-भाव के रूप में ; — प्रक्रिया ; — जगत् की ; — क्योंकि, जिससे

(वे मानते हैं कि) वही अर्थ-भाव के रूप में विवर्तित (प्रतीयमान) होता है, क्योंकि उससे ही जगत् की प्रक्रिया (होती है)।