विवर्ततेऽर्थभावेन प्रक्रिया जगतो यतः ॥९॥
vivartate'rthabhāvena prakriyā jagato yataḥ
(वे मानते हैं कि) वही अर्थ-भाव के रूप में विवर्तित (प्रतीयमान) होता है, क्योंकि उससे ही जगत् की प्रक्रिया (होती है)।
(वे मानते हैं कि) वही अर्थ-भाव के रूप में विवर्तित (प्रतीयमान) होता है, क्योंकि उससे ही जगत् की प्रक्रिया (होती है)।