मोहजयादनन्ताभोगात्सहजविद्याजयः ॥७॥
moha-jayād anantābhogāt sahaja-vidyā-jayaḥ
sūtra
मोह पर विजय और अनन्त आभोग (चेतना के अनन्त विस्तार) से सहज विद्या पर विजय (प्राप्त होती है)।
मोह पर विजय और अनन्त आभोग (चेतना के अनन्त विस्तार) से सहज विद्या पर विजय (प्राप्त होती है)।