3.6 मोहावरणात्सिद्धिः ॥६॥ mohāvaraṇāt siddhiḥ sūtra moha-āvaraṇāt — मोह-आवरण से — मोह के आवरण से (नपुं. एकवचन, अपादान, तत्पुरुष समास) ; siddhiḥ — सिद्धि — (आभासी) सिद्धि (स्त्री. एकवचन) मोह के आवरण से (अपूर्ण) सिद्धि (प्रतीत) होती है।