Śiva Sūtras · 3.5

Śiva Sūtras 3.5

3.5
नाडीसंहारभूतजयभूतकैवल्यभूतपृथक्त्वानि ॥५॥
nāḍī-saṃhāra-bhūta-jaya-bhūta-kaivalya-bhūta-pṛthaktvāni
sūtra
— नाडी-संहार — (प्राण-)नाडियों का विलय (समासगत स्तम्भ) ; — भूत-जय — तत्त्वों पर विजय (समासगत स्तम्भ) ; — भूत-कैवल्य — तत्त्वों से कैवल्य/शुद्धि (समासगत स्तम्भ) ; — भूत-पृथक्त्व — और तत्त्वों से पृथक्करण (नपुं. बहुवचन, द्वन्द्व समास)

नाडियों का संहार, भूतजय (तत्त्वों पर विजय), भूत-कैवल्य (तत्त्वों से पृथक्करण) और भूत-पृथक्त्व (तत्त्वों से विश्लेषण भी सिद्ध होते हैं)।