Śiva Sūtras · 3.30

Śiva Sūtras 3.30

3.30
स्वशक्तिप्रचयोऽस्य विश्वम् ॥३०॥
sva-śakti-pracayo 'sya viśvam
sūtra
— स्व-शक्ति-प्रचय — अपनी शक्तियों का विस्तार/समूह (पुं. एकवचन, तत्पुरुष समास) ; — अस्य — उसके लिए, उसका (पुं. एकवचन, सम्बन्ध कारक) ; — विश्व — विश्व, समस्त संसार (नपुं. एकवचन)

उसके लिए सम्पूर्ण विश्व अपनी ही शक्तियों का प्रचय (विस्तार) है।