Śiva Sūtras · 3.24

Śiva Sūtras 3.24

3.24
मात्रास्वप्रत्ययसन्धाने नष्टस्य पुनरुत्थानम् ॥२४॥
mātrāsva-pratyaya-sandhāne naṣṭasya punar-utthānam
sūtra
— मात्रास्व-प्रत्यय-सन्धान में — (अपनी) मात्राओं (विषय-अनुभवों) के प्रत्ययों के साथ अनुसन्धान करने पर (नपुं. एकवचन, अधिकरण कारक, तत्पुरुष समास) ; — नष्ट का — जो खो गया था (तुर्य अवस्था) उसका (पुं. एकवचन, सम्बन्ध कारक, भूत कृदन्त) ; — पुनः-उत्थान — पुनरुत्थान, फिर से उदय (नपुं. एकवचन, तत्पुरुष समास)

मात्राओं (विषय-अनुभूतियों) के प्रत्ययों के साथ अनुसन्धान करने से नष्ट (तुर्य) का पुनरुत्थान होता है।