त्रिषु चतुर्थं तैलवदासेच्यम् ॥२०॥
triṣu caturthaṃ tailavad āsecyam
sūtra
तीनों (अवस्थाओं — जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति) में चतुर्थ (तुर्य) को तेल की तरह आसिंचित (व्याप्त) किया जाए।
तीनों (अवस्थाओं — जाग्रत्, स्वप्न, सुषुप्ति) में चतुर्थ (तुर्य) को तेल की तरह आसिंचित (व्याप्त) किया जाए।