Śiva Sūtras · 3.21

Śiva Sūtras 3.21

3.21
मग्नः स्वचित्तेन प्रविशेत् ॥२१॥
magnaḥ sva-cittena praviśet
sūtra
— मग्न — (आत्मा में) निमग्न (पुं. एकवचन, भूत कृदन्त) ; — स्व-चित्त से — अपने (शुद्ध) चित्त के द्वारा (नपुं. एकवचन, करण कारक, तत्पुरुष समास) ; — प्रविशेत् — प्रवेश करे (हृदय में) (विधि लिङ्, प्रथम पुरुष, एकवचन)

(आत्म-तत्त्व में) निमग्न (योगी), अपने (शुद्ध) चित्त के द्वारा (हृदय में) प्रवेश करे।