Śiva Sūtras · 3.22

Śiva Sūtras 3.22

3.22
प्राणसमाचारे समदर्शनम् ॥२२॥
prāṇa-samācāre sama-darśanam
sūtra
— प्राण-समाचार में — जब प्राण (मन्द-समान) रूप से प्रवाहित हो (पुं. एकवचन, अधिकरण कारक, तत्पुरुष समास) ; — सम-दर्शन — सब में समान दृष्टि (नपुं. एकवचन, कर्मधारय समास)

प्राण के समाचार (मन्द-समान गति) में सम-दर्शन (सब में समान दृष्टि) उत्पन्न होता है।