आसनस्थः सुखं ह्रदे निमज्जति ॥१६॥
āsana-sthaḥ sukhaṃ hrade nimajjati
sūtra
आसन (शक्ति-रूप यथार्थ स्थान) में स्थित (योगी) सुखपूर्वक (परम चेतना के) ह्रद (सरोवर) में निमग्न हो जाता है।
आसन (शक्ति-रूप यथार्थ स्थान) में स्थित (योगी) सुखपूर्वक (परम चेतना के) ह्रद (सरोवर) में निमग्न हो जाता है।