Śiva Sūtras · 3.17

Śiva Sūtras 3.17

3.17
स्वमात्रानिर्माणमापादयति ॥१७॥
sva-mātrā-nirmāṇam āpādayati
sūtra
— स्व-मात्रा-निर्माण — (अपनी) चेतना के मात्र/अनुपात के अनुसार निर्माण (नपुं. एकवचन, कर्म कारक, तत्पुरुष समास) ; — आपादयति — सम्पन्न करता है, उत्पन्न करता है (वर्तमान काल, प्रथम पुरुष, एकवचन, प्रेरणार्थक)

(वह) स्व-मात्रा के अनुसार (अपनी चेतना के अनुपात में) सृष्टि का निर्माण कर लेता है।