Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.19 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.19

8.19
भूतग्रामः स एवायं भूत्वा भूत्वा प्रलीयते । रात्र्यागमेऽवशः पार्थ प्रभवत्यहरागमे ॥ ८-१९ ॥
bhūtagrāmaḥ sa evāyaṃ bhūtvā bhūtvā pralīyate | rātryāgame'vaśaḥ pārtha prabhavatyaharāgame || 8-19 ||
— यही भूत-समूह ; — बार-बार उत्पन्न होकर लीन होता है ; — रात्रि के आगमन पर विवश, हे पार्थ ; — और दिन के आगमन पर उत्पन्न होता है

हे पार्थ, यही भूत-समूह बार-बार उत्पन्न होकर रात्रि के आगमन पर विवश होकर लीन हो जाता है, और दिन के आगमन पर फिर उत्पन्न हो जाता है।