Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.15 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.15

8.15
मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् । नप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः ॥ ८-१५ ॥
māmupetya punarjanma duḥkhālayamaśāśvatam | napnuvanti mahātmānaḥ saṃsiddhiṃ paramāṃ gatāḥ || 8-15 ||
— मुझे प्राप्त करके पुनर्जन्म को ; — दुःख का आलय, अनित्य ; — महात्मा प्राप्त नहीं करते ; — परम संसिद्धि को पाए हुए

मुझे प्राप्त करके, परम संसिद्धि को पाए हुए महात्मा पुनर्जन्म को, जो दुःख का आलय और अनित्य है, प्राप्त नहीं होते।