Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.13 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.13

8.13
ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् । यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥ ८-१३ ॥
omityekākṣaraṃ brahma vyāharanmāmanusmaran | yaḥ prayāti tyajandehaṃ sa yāti paramāṃ gatim || 8-13 ||
— 'ॐ' इस एकाक्षर ब्रह्म का ; — उच्चारण करता हुआ, मुझे स्मरण करता हुआ ; — जो शरीर त्यागकर प्रयाण करता है ; — वह परम गति को प्राप्त होता है

'ॐ' इस एकाक्षर ब्रह्म का उच्चारण करता हुआ और मुझे स्मरण करता हुआ, जो शरीर त्यागकर प्रयाण करता है, वह परम गति को प्राप्त होता है।