ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन् ।
यः प्रयाति त्यजन्देहं स याति परमां गतिम् ॥
८-१३ ॥
omityekākṣaraṃ brahma vyāharanmāmanusmaran |
yaḥ prayāti tyajandehaṃ sa yāti paramāṃ gatim ||
8-13 ||
"ॐ" या एकाक्षर ब्रह्माचा उच्चार करत व माझे स्मरण करत जो देह सोडून जातो, तो परम गती प्राप्त करतो.