Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.1 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.1

8.1
किं तद् ब्रह्म किमध्यात्मं किं कर्म पुरुषोत्तम । अधिभूतं च किं प्रोक्तमधिदैवं किमुच्यते ॥ ८-१ ॥
kiṃ tad brahma kimadhyātmaṃ kiṃ karma puruṣottama | adhibhūtaṃ ca kiṃ proktamadhidaivaṃ kimucyate || 8-1 ||
— वह ब्रह्म क्या, अध्यात्म क्या ; — कर्म क्या, हे पुरुषोत्तम ; — और अधिभूत क्या कहा गया ; — अधिदैव क्या कहलाता है

हे पुरुषोत्तम, वह ब्रह्म क्या है? अध्यात्म क्या है? कर्म क्या है? और अधिभूत क्या कहा गया है, तथा अधिदैव क्या कहलाता है?