Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.44 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.44

6.44
अथवा योगिनामेव जायते धीमतां कुले । एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम् ॥ ६-४४ ॥
athavā yogināmeva jāyate dhīmatāṃ kule | etaddhi durlabhataraṃ loke janma yadīdṛśam || 6-44 ||
— अथवा योगियों के ही ; — बुद्धिमानों के कुल में जन्म लेता है ; — यह अत्यन्त दुर्लभ है ; — लोक में, ऐसा जन्म जो हो

अथवा वह बुद्धिमान् योगियों के ही कुल में जन्म लेता है; ऐसा जन्म, जो इस प्रकार का हो, लोक में अत्यन्त दुर्लभ है।