प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम् ।
उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम् ॥
६-२८ ॥
praśāntamanasaṃ hyenaṃ yoginaṃ sukhamuttamam |
upaiti śāntarajasaṃ brahmabhūtamakalmaṣam ||
6-28 ||
इस प्रशान्त मन वाले, जिसका रजोगुण शान्त हो गया, जो ब्रह्मभूत और निष्पाप है — ऐसे योगी को उत्तम सुख प्राप्त होता है।