इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः ।
निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद् ब्रह्मणि ते स्थिता ॥
६-१० ॥
ihaiva tairjitaḥ sargo yeṣāṃ sāmye sthitaṃ manaḥ |
nirdoṣaṃ hi samaṃ brahma tasmād brahmaṇi te sthitā ||
6-10 ||
जिनका मन समता में स्थित है, उन्होंने इसी लोक में सृष्टि (संसार) को जीत लिया; क्योंकि ब्रह्म निर्दोष और सम है, अतः वे ब्रह्म में स्थित हैं।