Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.10 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.10

6.10
इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः । निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद् ब्रह्मणि ते स्थिता ॥ ६-१० ॥
ihaiva tairjitaḥ sargo yeṣāṃ sāmye sthitaṃ manaḥ | nirdoṣaṃ hi samaṃ brahma tasmād brahmaṇi te sthitā || 6-10 ||
— उनके द्वारा इसी लोक में सृष्टि जीती गई ; — जिनका मन समता में स्थित ; — क्योंकि ब्रह्म निर्दोष और सम ; — अतः वे ब्रह्म में स्थित

जिनका मन समता में स्थित है, उन्होंने इसी लोक में सृष्टि (संसार) को जीत लिया; क्योंकि ब्रह्म निर्दोष और सम है, अतः वे ब्रह्म में स्थित हैं।