Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 5.14 / 29

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)5.14

5.14
न कर्तृत्वं न कर्माणि लोकस्य सृजति प्रभुः । न कर्मफलसंयोगं स्वभावस्तु प्रवर्तते ॥ ५-१४ ॥
na kartṛtvaṃ na karmāṇi lokasya sṛjati prabhuḥ | na karmaphalasaṃyogaṃ svabhāvastu pravartate || 5-14 ||
— न कर्तृत्व न कर्मों को ; — प्रभु (आत्मा) लोक के लिए रचता है ; — न कर्मफल के संयोग को ; — किन्तु प्रकृति (स्वभाव) प्रवृत्त होती है

प्रभु (आत्मा) न लोक के कर्तृत्व की रचना करता है, न कर्मों की, न कर्मफल के संयोग की; किन्तु प्रकृति (स्वभाव) ही प्रवृत्त होती है।