Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 5.12 / 29

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)5.12

5.12
युक्तः कर्मफलं त्यक्त्वा शान्तिमाप्नोति नैष्ठिकीम् । अयुक्तः कामकारेण फले सक्तो निबध्यते ॥ ५-१२ ॥
yuktaḥ karmaphalaṃ tyaktvā śāntimāpnoti naiṣṭhikīm | ayuktaḥ kāmakāreṇa phale sakto nibadhyate || 5-12 ||
— युक्त कर्मफल त्यागकर ; — नैष्ठिकी शान्ति पाता है ; — अयुक्त काम के वेग से ; — फल में आसक्त होकर बँधता है

युक्त पुरुष कर्मफल को त्यागकर नैष्ठिकी (स्थायी) शान्ति को प्राप्त करता है; अयुक्त पुरुष काम के वेग से फल में आसक्त होकर बँध जाता है।