Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.14 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.14

4.14
न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कामः फलेष्वपि । इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ॥ ४-१४ ॥
na māṃ karmāṇi limpanti na me kāmaḥ phaleṣvapi | iti māṃ yo'bhijānāti karmabhirna sa badhyate || 4-14 ||
— मुझे कर्म लिप्त नहीं करते ; — न फलों में मेरी कामना ; — जो मुझे इस प्रकार जानता है ; — वह कर्मों से नहीं बँधता

मुझे कर्म लिप्त नहीं करते, न फलों में मेरी कोई कामना है; जो मुझे इस प्रकार जानता है, वह कर्मों से नहीं बँधता।